होली रंगों का त्योहार है जो प्रेम, भाईचारे और नववर्ष का प्रतीक है। इस बार पर्यावरण के प्रति जागरूक होकर सुरक्षित होली मनाएं। प्राकृतिक रंगों से धरती को हरा-भरा रखें।
हल्दी, नीम, चंदन, फूलों की पंखुड़ियां और बीट रूट से घर पर रंग बनाएं। ये त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के लिए हानिरहित हैं। रासायनिक रंगों से बचें जो नदियों को प्रदूषित करते हैं।
हल्दी, नीम, चंदन, फूलों की पंखुड़ियां और बीट रूट से घर पर रंग बनाएं। ये त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के लिए हानिरहित हैं। रासायनिक रंगों से बचें जो नदियों को प्रदूषित करते हैं।
प्लास्टिक की पिचकारी न खरीदें, मिट्टी या बांस की पिचकारी इस्तेमाल करें। बायोडिग्रेडेबल गुझिया के डिब्बे चुनें। प्लास्टिक कचरा धरती को नुकसान पहुंचाता है।
बच्चों को प्राकृतिक रंग दें, आंखों पर ध्यान रखें। ढीले कपड़े पहनाएं, पानी से बचाएं। होली के बाद अच्छे से नहलाएं।
प्राकृतिक तेल लगाकर खेलें, सनस्क्रीन का उपयोग करें। रंग हटाने के लिए दही-बेसन का उबटन बनाएं। आंखों और मुंह पर रंग न लगाएं।
घर का बना गुजिया, मालपुआ, ठंडाई परोसें। मिट्टी के कुल्हड़ में तांडई सर्व करें। पैकेज्ड मिठाइयों से परहेज करें।
होली के बाद सड़कों की सफाई करें। पेड़ लगाएं, नदियों में रंग न बहाएं। सुरक्षित और हरी होली के संकल्प के साथ विदाई लें।