दोस्तों, इस पोस्ट में हम जानेंगे “बिहार में प्रथम” से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी। इसमें बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मुख्य न्यायाधीश, विश्वविद्यालय आदि से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं, जो बिहार में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। पिछले कई परीक्षाओं में “बिहार में प्रथम” से संबंधित प्रश्न पूछे जा चुके हैं। तो आइए जानते हैं बिहार सामान्य ज्ञान के अंतर्गत “बिहार में प्रथम” से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न, जो इस प्रकार हैं:-
पश्चिम भारत में स्थित बिहार राज्य भारत का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है, जो अपनी अद्भुत कला और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां विभिन्न त्योहारों और मेलों का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाता है, जो न केवल भारत में बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी लोकप्रिय हैं। यही कारण है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बिहार के इन मेलों से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इस लेख में, हम बिहार राज्य के प्रमुख मेलों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, जो जनरल नॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
फारबिसगंज मेला
स्थान – फारबिसगंज अररिया
अवसर – काली पूजा
तिथि – अक्टूबर-नवंबर
अवधि – 15 दिन
गोपाष्टमी मेला
स्थान – खगड़िया अवसर गोपाष्टमी
तिथि – अक्टूबर-नवंबर
अवधि – 1 दिन
पदमपुर मेला
स्थान – सरायकेला
अवसर – लक्ष्मी काली पूजा
तिथि – अक्टूबर-नवंबर
अवधि – एक दिन
पुस्तक मेला
स्थान – गांधी मैदान पटना
तिथि – अक्टूबर\नवंबर \दिसंबर
अवधि – 15 दिन
गुरु पर्व
स्थान – पटना साहिब पटना सिटी
अवसर – गुरु नानक का जन्म दिन
अवधि – एक दिन
विवाह पंचमी मेला
स्थान – सीतामढ़ी
अवसर – राम और सीता का विवाह दिन
तिथि – नवंबर दिसंबर
अवधि – 7 दिन
किसान मेला या कृषि मेला
स्थान – पूसा (मुजफ्फरपुर)
गुलाब बाग मेला
स्थान – गुलाब बाग पूर्णिया
तिथि – दिसंबर
अवधि – 15 दिन
लौरिया नंदनगढ़ मेला
स्थान – बगहा (पश्चिम चंपारण)
तिथि – नवंबर दिसंबर
अवधि – 15 दिन
मलमास मेला
स्थान – राजगीर
अवसर – मलमास
तिथि – प्रत्येक मलमास
अवधि – एक महीना
मकर मेला
स्थान – राजगीर
अवसर – मकर संक्रांति या तिल सक्रांति
तिथि – 14 जनवरी
अवधि – 7 दिन
बांसी मेला
स्थान – बांका
अवसर- मकर सक्रांति
अवधि – 5 दिन
सिद्धेश्वर मेला
स्थान- सिद्धेश्वर (मधेपुरा)
अवसर – शिवरात्रि
तिथि – फरवरी-मार्च
अवधि – 7 दिन
बिंदेश्वर मेला
स्थान – झंझारपुर
अवसर –शिवरात्रि
तिथि- फरवरी-मार्च
अवधि –2 दिन
पशु मेला
स्थान- ब्रह्मपुर (बक्सर)
अवसर- शिवरात्रि
तिथि – फरवरी \मार्च
अवधि – 7 दिन
तुर्की मेला तुर्की
स्थान- मुजफ्फरपुर
अवसर – शिवरात्रि
तिथि – फरवरी-मार्च
अवधि – 6 दिन
महाशिवरात्रि मेला
स्थान – रक्सौल
अवसर – शिव पार्वती विवाह महोत्सव
तिथि – फरवरी-मार्च
अवधि – 1 दिन
हरदी मेला
स्थान – मुजफ्फरपुर
अवसर – शिवरात्रि
तिथि- फरवरी \ मार्च
अवधि – 15 दिन
रामनवमी मेला
स्थान – सीतामढ़ी
अवसर – राम जन्मोत्सव
तिथि – मार्च\अप्रैल
अवधि – 1 दिन
बिहार के ये मेले राज्य के सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देते हैं। देश-विदेश से पर्यटक इन आयोजनों में शामिल होने आते हैं, जिससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलता है बल्कि राज्य की पहचान भी बढ़ती है।
सोनपुर मेला का आयोजन किस नदी के किनारे किया जाता है?
गंडक नदी के किनारे।
पितृपक्ष मेले का महत्व क्या है?
पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान।
वैशाली महोत्सव किस धर्म से संबंधित है?
बौद्ध और जैन धर्म।
बिहार की कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए इन मेलों को व्यापक रूप से प्रचारित किया जाना चाहिए। स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को मंच प्रदान करना और इन आयोजनों को डिजिटल माध्यमों से प्रसारित करना एक सकारात्मक कदम हो सकता है।