गौतम बुद्ध के द्वारा दिए गए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य| बुद्ध पूर्णिमा special 2024

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2024-05-23 | 17:56h
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2025-01-06 | 18:13h
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बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे भगवान गौतम बुद्ध के जीवन के तीन महत्वपूर्ण घटनाओं के रूप में मनाया जाता है: उनका जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि), और महापरिनिर्वाण (मृत्यु)। यह पर्व वैशाख महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो आमतौर पर अप्रैल या मई महीने में पड़ता है। इस दिन को वेसाक या वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।बुद्ध पूर्णिमा न केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए, बल्कि समस्त मानवता के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। यह हमें शांति, अहिंसा, करुणा और ज्ञान का संदेश देता है, जो सभी धर्मों और संस्कृतियों के लोगों के लिए प्रासंगिक हैं।

भगवान गौतम बुद्ध का जीवन:

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी (वर्तमान में नेपाल में) एक राजकुमार के रूप में हुआ था। उनके जन्म का नाम सिद्धार्थ था।

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गौतम बुद्ध का माता का नाम महामाया देवी था जो सिद्धार्थ के जन्म के 7  दिन बाद ही मृत्यु हो गई इनका लालन – पालन उनकी सौतेली मां प्रजापति गौतमी ने किया पिता का नाम शुध्दोधन  था जो शाक्ण गण के मुखिया के थे | 16 वर्ष की आयु में गौतम बुद्ध का विवाह यशोधरा नामक कन्या हो गया जिन्होंने पुत्र को जन्म दिया पुत्र का नाम राहुल था |

कुछ समय बाद गौतम बुद्ध जब कपिलवस्तु की सैर पर निकले तो उन्होंने निम्न 4 दृश्य को क्रमशः देखा 1.  बुद्ध व्यक्ति 2. एक बीमार व्यक्ति 3. शव 4. सन्यासी को दिखा

 सांसारिक समस्याओं से व्यथित  होकर  सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग  किया गृह त्याग के बाद सिद्धार्थ (बौद्ध) ने वैशाली के आलारकलम के सांख्य  दर्शन की शिक्षा ग्रहण की| बिना जल-आन्न ग्रहण किए की 6 वर्ष के कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख  की पूर्णिमा की रात निरंजन फल्गु नदी के किनारे पीपल वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान की प्राप्ति हुई |बौद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया था जिसे बौद्ध ग्रंथो  में धर्मचक्रप्रवर्तन कहा जाता है | बुद्ध उपदेश पाली भाषा दिए  थे 

निवार्ण बौद्ध धर्म का परम लक्ष्य है इसका अर्थ है:-दीपक का बुझ जाना अर्थात जीवन मरण चक्र से मुक्त हो जाना

महापरिनिर्वाण: 80 वर्ष की आयु में, उन्होंने कुशीनगर (वर्तमान में उत्तर प्रदेश, भारत) में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया।

उत्सव और समारोह:

बौद्ध अनुयायी मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और बुद्ध की मूर्तियों पर जल, फूल और अगरबत्ती चढ़ाते हैं।

बुद्ध के उपदेशों को सुनने और ध्यान करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

मंदिरों और बौद्ध विहारों को दीपक, फूल और बौद्ध झंडों से सजाया जाता है।

ध्यान और प्रार्थना:

अनुयायी इस दिन विशेष ध्यान और प्रार्थना सत्र आयोजित करते हैं। यह आत्मचिंतन और मानसिक शांति का समय होता है।

ध्यान और साधना का अभ्यास बुद्ध के जीवन के महत्व को समझने और उनके मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

दान और सेवा:

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर दान देना और गरीबों एवं जरूरतमंदों की सहायता करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

लोग अनाथालय, वृद्धाश्रम आदि में जाकर सेवा करते हैं और दान-पुण्य करते हैं।

उपवास और संयम:

कई बौद्ध अनुयायी इस दिन उपवास रखते हैं और संयमित आचरण करते हैं। वे अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

उपवास और संयम का पालन बुद्ध के शिक्षाओं के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का एक तरीका है।

प्राकृतिक सजावट:

मंदिरों और बौद्ध विहारों को विशेष रूप से सजाया जाता है। इसमें बौद्ध झंडे, दीपक और रंग-बिरंगे फूलों का उपयोग किया जाता है।

विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और झांकियां भी प्रस्तुत की जाती हैं, जो बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं को दर्शाती हैं।

गौतम बुद्ध  के द्वारा  दिए गए मार्ग 

गौतम बुद्ध द्वारा दिए गए मार्ग मुख्य रूप से “आठ तत्वों का मार्ग” (अष्टांगिक मार्ग) और “चार आर्य सत्य” (चार आर्य सत्यों) पर आधारित हैं। ये मार्ग और सिद्धांत जीवन के दुःख से मुक्ति और आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं।

चार आर्य सत्य (Four Noble Truths)

दुःख (Dukkha): जीवन में दुःख और पीड़ा का अस्तित्व है। यह जन्म, बुढ़ापा, बीमारी, मृत्यु, वियोग, इच्छाओं की पूर्ति न होना आदि से जुड़ा है।

दुःख समुदय (Samudaya): दुःख का कारण तृष्णा (इच्छा, लालसा) है। यह लालसा काम, अस्तित्व और विनाश के लिए होती है।

दुःख निरोध (Nirodha): तृष्णा का निरोध करना ही दुःख का निरोध करना है। जब तृष्णा समाप्त हो जाती है, तब निर्वाण (निर्वाण) प्राप्त होता है, जो शांति और मुक्तता की अवस्था है।

दुःख निरोध गामिनी प्रतिपद (Magga): दुःख की समाप्ति के लिए अष्टांगिक मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।

अष्टांगिक मार्ग (Noble Eightfold Path)

सम्यक दृष्टि (Right View): चार आर्य सत्यों को समझना और स्वीकार करना।

सम्यक संकल्प (Right Intention): तृष्णा, द्वेष और हिंसा से मुक्त विचार रखना।

सम्यक वाक (Right Speech): सत्य, मधुर, और लाभकारी वचन बोलना।

सम्यक कर्म (Right Action): अहिंसा, चोरी न करना, और नैतिक आचरण करना।

सम्यक आजीविका (Right Livelihood): ऐसे व्यवसाय का पालन करना जो दूसरों को नुकसान न पहुंचाए।

सम्यक प्रयास (Right Effort): अच्छे विचारों को बनाए रखना और बुरे विचारों को समाप्त करना।

सम्यक स्मृति (Right Mindfulness): अपने शरीर, भावनाओं, मन और धारणाओं के प्रति सजग रहना।

सम्यक समाधि (Right Concentration): ध्यान और मानसिक एकाग्रता का अभ्यास करना।

ये मार्ग और सिद्धांत बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक नैतिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का मार्ग प्रदान करते हैं। गौतम बुद्ध ने यह सिखाया कि इन मार्गों का पालन करके कोई भी व्यक्ति आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।

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