2 अक्टूबर को हर साल गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भारत की आज़ादी में अहम योगदान देने वाले मोहनदास करमचंद गांधी (Mohandas Karamchand Gandhi) का जन्म हुआ था। उन्हें महात्मा गांधी, राष्ट्रपिता और बापू के नाम से भी जाना जाता है। गांधी जी जीवनभर अहिंसा के महत्व पर जोर देते रहे, और इसी कारण 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस (International Non-Violence Day) के रूप में भी मनाया जाता है। इस वर्ष 155वीं गांधी जयंती मनाई जा रही है। इस दिन का उद्देश्य महात्मा गांधी की उपलब्धियों और उनके सिद्धांतों को लोगों तक पहुंचाना है। भारत में गांधी जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय अवकाश भी होता है।
| नाम | मोहनदास करमचंद गांधी (बापू ) |
| जन्म | 2 अक्टूबर, 1869 को पोरबंदर, (गुजरात) |
| पिता | पिता करमचंद गांधी |
| माता | पुतलीबाई |
| पत्नी | कस्तूरबा गांधी |
| पुत्र | हरिलाल गांधी (1888–1948),मणिलाल गांधी (1892–1956),रामदास गांधी (1897–1969),देवदास गांधी (1900–1957) |
| महात्मा किसने कहाँ | रविन्द्रनाथ टैगोर |
| राष्ट्रपिता किसने कहाँ | सुभाषचन्द्र बोस |
| 2 अक्टूबर | अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस (International Non-Violence Day) |
| इस वर्ष 2024 में कौन सा जयंती | इस वर्ष 155वीं |
| निधन | 30 जनवरी, 1948 (शहीद दिवस (Martyrs’ Day) |
| किसने मारा | नाथूराम गोडसे |
| प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें | हिंद स्वराज ,दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास,सत्य के प्रयोग (आत्मकथा),गीता माता |
1888 में, गांधी जी कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए। वहां से उन्होंने बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त की और भारत लौटे। हालांकि, उन्हें वकालत में सफलता नहीं मिली, जिसके बाद वे दक्षिण अफ्रीका चले गए। यहीं से उनके जीवन में एक नया मोड़ आया।
दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने भारतीयों के खिलाफ हो रहे नस्लीय भेदभाव का सामना किया। ट्रेन से उतारने की घटना उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने उनके मन में असमानता और अन्याय के खिलाफ लड़ाई की भावना को और मजबूत किया। दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों पर आधारित अपने संघर्ष की शुरुआत की।
1915 में गांधी जी भारत लौटे और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। उन्होंने किसानों, श्रमिकों और गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन किए। गांधी जी के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण आंदोलनों का आगाज हुआ, जिनमें से कुछ मुख्य निम्नलिखित हैं:
असहयोग आंदोलन (1920)
गांधी जी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन की शुरुआत की, जिसमें भारतीय जनता से ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार करने और स्वदेशी वस्त्र अपनाने की अपील की गई थी।
नमक सत्याग्रह (1930)
नमक पर ब्रिटिश कर के खिलाफ गांधी जी ने दांडी मार्च का आयोजन किया। यह मार्च साबरमती आश्रम से दांडी तक लगभग 240 मील लंबी यात्रा थी, जो ब्रिटिश कानून के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध थी।
भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गांधी जी ने “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का नारा दिया, जिससे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा मिली।
अहिंसा का सिद्धांत
गांधी जी का सबसे प्रमुख सिद्धांत था अहिंसा। उनका मानना था कि किसी भी प्रकार की हिंसा से केवल दुख और विनाश होता है। उन्होंने अहिंसा को सबसे शक्तिशाली हथियार बताया, जिसके जरिए अन्याय के खिलाफ लड़ा जा सकता है।
स्वराज और स्वदेशी
गांधी जी ने स्वराज यानी आत्म-शासन और स्वदेशी का समर्थन किया। वे चाहते थे कि भारत आत्मनिर्भर बने और विदेशी वस्त्रों और वस्तुओं का बहिष्कार करे। उनका मानना था कि भारत की आत्मनिर्भरता ही उसकी असली स्वतंत्रता है।
गांधी जयंती न केवल भारत में, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त है। 2007 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया, जिससे यह दिन वैश्विक महत्व का हो गया।
आधुनिक भारतीय समाज पर प्रभाव
गांधी जी के सिद्धांतों ने आधुनिक भारतीय समाज को गहराई से प्रभावित किया है। उनकी विचारधारा ने भारतीय राजनीति, शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था को नया रूप दिया। आज भी गांधी जी के विचार स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और गरीबी उन्मूलन जैसे अभियानों में देखे जा सकते हैं।
गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत अभियान का भी आयोजन किया जाता है। महात्मा गांधी ने हमेशा स्वच्छता और स्वास्थ्य पर जोर दिया, इसलिए इस दिन देशभर में स्वच्छता अभियानों का आयोजन होता है।
महात्मा गांधी का निधन 30 जनवरी, 1948 को हुआ था। उस दिन गांधी जी नई दिल्ली के बिड़ला हाउस (अब गांधी स्मृति) में शाम की प्रार्थना सभा के लिए जा रहे थे, तभी नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। गांधी जी की मृत्यु से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। इस दिन को हर साल शहीद दिवस (Martyrs’ Day) के रूप में मनाया जाता है, और गांधी जी के योगदान और उनके अहिंसा के संदेश को याद किया जाता है।
गांधी जयंती महात्मा गांधी के प्रति हमारी श्रद्धा का प्रतीक है। यह दिन हमें उनके विचारों और सिद्धांतों को अपनाने की प्रेरणा देता है। गांधी जी ने जो संघर्ष और त्याग किया, उसकी बदौलत हम आज़ादी की हवा में सांस ले रहे हैं। उनके अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलकर हम एक बेहतर समाज और दुनिया का निर्माण कर सकते हैं।