परमाणुओं के नाभिक में विद्यमान धन आवेशित कणों को ही प्रोटॉन कहते हैं
प्रोटॉन एक परमाणु के नाभिक में स्थित एक धन आवेशित कण है, जिसे 1920 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड यानी रदरफोर्ड द्वारा खोजा गया था। रदरफोर्ड ने 1917 में यह सिद्ध किया कि हाइड्रोजन परमाणु (अर्थात एक प्रोटॉन) का केंद्रक अन्य सभी परमाणुओं के नाभिक में मौजूद है
प्रोटॉन की खोज का इतिहास – History of discovery of Proton
क्या आप जानते हैं 1815 की शुरुआत में वैज्ञानिक बृजेश रावत ने यह विचार रखा की सभी परमाणु हाइड्रोजन के परमाणु से मिलकर बने हैं, जिसे उन्होंने protyles का नाम दिया। इसके पश्चात सन 1898 में वैज्ञानिक विल्हेम विहेम ने था
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1910 में वैज्ञानिक जे जे थॉमसन ने एक ऐसे धनात्मक कण की खोज की जिसका द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान के बराबर था।
फिर वैज्ञानिक यूजिंग गोल्डस्टीन ने सन 1986 में अनुज किरण के प्रयोग के दौरान प्रोटॉन को हाइड्रोजन आयन अर्थात H+ के रूप में देखा था। उसके बाद सन् 1917 से 1920 के बीच में रदरफोर्ड ने अपने प्रयोग अल्फा किरण द्वारा, नाभिक में मौजूद धन आवेश भाग प्रोटॉन की खोज की। का इसका नाम हाइड्रोजन न्यूक्लियस से बदलकर प्रोटोन रख दिया गया। अब हम अपने इस अभिलेख में प्रोटॉन क्या है में अब हम कुछ तथ्य के बारे में अध्ययन करेंगे।
प्रोटॉन के बारे में कुछ बातें –
हम अब आपको प्रोटॉन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बाते निम्नलिखित हैं :-
वैज्ञानिक लिटरेचर में प्रोटोन शब्द का प्रयोग प्रथम बार सन् 1920 में हुआ।
प्रोटॉन नाभिक के अंदर न्यूट्रॉन के साथ स्थित रहता है।
हाइड्रोजन परमाणु के हल्के आइसोटोप में न्यूट्रॉन नहीं पाए जाते हैं, सिर्फ प्रोटोन पाए जाते हैं। परंतु हाइड्रोजन के heavy isotopes में दो न्यूट्रॉन पाए जाते हैं।
प्रोटोन को अंग्रेजी अक्षर के p से रिप्रेजेंट करते हैं। क्युकी प्रोटॉन की स्पेलिंग p से शुरू होती है इसलिए ऐसा किया जाना उचित लगा होगा।
अब यदि बात की जाए प्रोटॉन का द्रव्यमान की तो इसका मान67×10-24 kg या 1.6726×10-24 kg होता है। यहां सबसे खास बात यह है कि प्रोटोन और न्यूट्रॉन का द्रव्यमान ही परमाणु के संपूर्ण द्रव्यमान के बराबर होता है।
परमाणु में उसके केंद्र में एक सूक्ष्म ठोस भाग पाया जाता है जिसे नाभिक का नाम दिया गया है। इस नाभिक के अंदर प्रोटॉन रहते हैं जो कि धनावेशित होते हैं, प्रोटॉन के साथ में न्यूट्रॉन भी पाए जाते हैं परंतु ये उदासीन होते हैं, उन पर कोई भी आवेश नहीं होता है।
प्रोटोन पर जो धन आवेश पाया जाता है उसे एक इकाई धन आवेश कहते हैं जिसका मान6×10-19 कूलोम होता है। नाभिक के चारों ओर चक्कर लगा रहे इलेक्ट्रॉनों पर भी उतना ही आवेश होता है। परंतु इलेक्ट्रॉन के आवेश की प्रकृति प्रोटॉन पर आवेश की प्रकृति के विपरीत होती है।
प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान से लगभग 1837 गुना ज्यादा होता है। प्रोटॉन क्या है आर्टिकल में अभी और भी प्वाइंट बाकी है। इन्हे ध्यान पूर्वक पढ़ते रहिए।
अलग-अलग प्रकार के परमाणुओं में प्रोटॉन की संख्या भिन्न होती है। उदाहरण के लिए सोडियम के परमाणु में 11 प्रोटॉन होते हैं और कार्बन के परमाणु में 12 प्रोटॉन पाए जाते हैं।
नाभिक के अंदर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन आपस में नाभिकीय बल के कारण जुड़े रहते हैं। इसी कारण ये स्थाई भी रहते हैं।
हाइड्रोजन परमाणु के हल्के आइसोटोप में न्यूट्रॉन नहीं पाए जाते हैं, सिर्फ प्रोटोन पाए जाते हैं। परंतु हाइड्रोजन के heavy isotopes में दो न्यूट्रॉन पाए जाते हैं। ड्यूटीरियम और ट्रिटियम, हाइड्रोजन के भारी आइसोटोप हैं।
मॉडर्न फिजिक्स के अनुसार यह खोज करके पता लगाया गया है कि प्रोटॉन परमाणु के नाभिक का मूल कण नहीं है बल्कि इससे भी छोटे कण प्रोटोन में पाए जाते हैं जिन्हें क्वार्क कहते हैं।
प्रोटॉन की खोज कैसे हुई?
गोल्ड फ़ॉइल प्रयोग किया तो पता चला , एर्नेस्ट रदरफोर्ड ने एक अल्ट्राथिन गोल्ड फ़ॉइल पर अल्फा कणों की बमबारी की, जिससे पता लगा कि अल्फा कणों ज़िंक सल्फाइड (ZnS) स्क्रीन पर गिरने पर बिखर (scattered) रही थी.
प्रोटॉन का अवलोकन (Observation) :-
अधिकांश अल्फा पार्टिकल deflect नहीं हुए, वे पन्नी (foil) से पास हो गए.
कुछ अल्फा पार्टिकल छोटे angle पर deflect हुए.
बहुत कम ऐसे पार्टिकल थे फ़िर से वापस आए यानी 20,000 में 1 ही वापस आया.
प्रोटॉन के बारे में रदरफोर्ड ने निम्नलिखित बातें बताये :-
परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और उसका संपूर्ण धनात्मक आवेश एक छोटे से कोर में सीमित होता है, जिसे नाभिक (nucleus) कहा जाता है. इस नाभिक में धनावेशित कण होता है जिसे प्रोटॉन कहते हैं.
नाभिक के बाहर बिखरे हुए ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों की संख्या नाभिक में धनात्मक आवेशों (Proton) की संख्या के समान होती है. यह एक परमाणु की समग्र विद्युत तटस्थता (neutrality) की व्याख्या करता है.
परमाणु का अधिकांश आयतन खाली स्पेस होता है.
रदरफोर्ड द्वारा किए गए इस गोल्ड फ़ॉइल प्रयोग (Gold Foil experiment) ने एक परमाणु की संरचना में महान अंतर्दृष्टि प्रदान की, और नए वैज्ञानिकों के लिए सीखने का एक दायरा प्रदान किया |
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