परिभाषा:-
घर्षण बल वह बल है जो किसी वस्तु की सतह पर दूसरी वस्तु के संपर्क में आने पर उसकी गति का विरोध करता है। यह बल वस्तु की गति को रोकने या धीमा करने का कार्य करता है।
जब दो सतहें आपस में संपर्क करती हैं, तो उनकी खुरदुरापन (roughness) और सतह के अणुओं के बीच के परस्पर आकर्षण के कारण घर्षण बल उत्पन्न होता है।
घर्षण बल (Frictional Force) के 3 प्रकार होते हैं |
जब किसी वस्तु को दूसरी वस्तु के तल पर खिसकाने का प्रयास किया जाता है, लेकिन वह वस्तु गति की अवस्था में नहीं आती, तब उनके बीच जो घर्षण बल कार्य करता है, उसे स्थैतिक घर्षण बल कहते हैं।
यह एक समायोजित बल होता है, जो आरोपित बल के साथ बढ़ता है।
जब तक आरोपित बल वस्तु को गति में नहीं लाता, तब तक स्थैतिक घर्षण बल भी बढ़ता रहता है।
(बल (f8 ) = u8 R)
जब किसी वस्तु पर लगाया गया बल धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है, तो स्थैतिक घर्षण बल भी साथ-साथ बढ़ता है।
स्थैतिक घर्षण बल का अधिकतम मान, जिससे वस्तु गति करना शुरू करती है, सीमान्त घर्षण बल कहलाता है।
सीमान्त घर्षण बल का सूत्र:–
(ft = ut R)
जब एक वस्तु दूसरी वस्तु की सतह पर गति कर रही होती है, तो उनकी आपेक्षिक गति का विरोध करने वाला बल गतिक घर्षण बल कहलाता है।
यह बल स्थिर नहीं रहता, बल्कि वस्तु की गति के दौरान लगने वाला होता है।
गतिक घर्षण बल का सूत्र:-
(fk = uk N)
विशेषताएँ:-
गतिक घर्षण बल 2 प्रकार का होता है
जब कोई वस्तु किसी सतह पर लुढ़कती है, तो उस वस्तु और सतह के बीच जो घर्षण बल उत्पन्न होता है, उसे लोटनिक घर्षण बल कहते हैं।
विशेषताएँ:-
जब कोई वस्तु किसी सतह पर सरकती है, तो सरकने वाली वस्तु और उस सतह के बीच जो घर्षण बल उत्पन्न होता है, उसे सर्पी घर्षण बल कहते हैं।
विशेषताएँ:-