Important Question For Bihar Board D.EI.ED
सोनपुर मेलाAMP
विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला, जिसे “हरिहर क्षेत्र मेला” भी कहा जाता है, एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। यह मेला कार्तिक पूर्णिमा के समय आयोजित किया जाता है और इसकी परंपरा महाभारत काल से जुड़ी है। यहां हाथियों, घोड़ों और अन्य पशुओं का व्यापार होता है, जो इसे विशिष्ट बनाता है।
गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व कपिलवस्तु के लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था
“कर्मधारय समास ”
इसमें दोनों पदों का अर्थ एक ही वस्तु या व्यक्ति को बताते हैं, और विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है।
उदाहरण:-
नीलकमल (नीला कमल)
समास के भेद मुख्य रूप से छह प्रकार के माने जाते हैं। इनमें से चार मुख्य भेद और दो उपभेद होते हैं। यहां समास के सभी भेदों का विवरण दिया गया है:
इस समास में पहला पद (शब्द) दूसरे पद का विशेषण या कारक होता है। इसमें कारक चिह्न लुप्त हो जाते हैं।
उपभेद:
इसमें विशेषण और विशेष्य का संबंध होता है।
उदाहरण:
इसमें दोनों पद समान महत्व रखते हैं और “और” का अर्थ प्रकट होता है।
उदाहरण:
इसमें दोनों पद मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु का बोध कराते हैं।
उदाहरण:
इसमें पहला पद अव्यय होता है और दूसरा पद उसके अर्थ को स्पष्ट करता है।
उदाहरण:
इसमें पहला पद संख्या या दिशा को व्यक्त करता है।
उदाहरण:
समास के ये छह भेद हिंदी व्याकरण की गहराई और वाक्य को प्रभावशाली बनाने का माध्यम हैं। हर भेद का अपना विशिष्ट उपयोग है, जो भाषा को सरल और संक्षिप्त बनाने में मदद करता है।
यूरेनियमAMP उपयोग और सुरक्षा उपाय
इसका रासायनिक सूत्र (NaHCO₃) है।
बेकिंग सोडा, जिसे आमतौर पर किचन और बेकिंग में उपयोग किया जाता है, का रासायनिक नाम सोडियम बाइकार्बोनेट है। इसका रासायनिक सूत्र NaHCO₃ है। यह एक सफेद, क्रिस्टलीय पाउडर है जो क्षारीय प्रकृति का होता है। बेकिंग सोडा का उपयोग केवल खाना पकाने में ही नहीं, बल्कि सफाई, स्वास्थ्य, और व्यक्तिगत देखभाल में भी किया जाता है।
जयराम दास दौलतराम
बिहार की “शोक नदी” के नाम से प्रसिद्ध कोसी नदी है।
बिहार की “शोक नदी” के नाम से प्रसिद्ध कोसी नदी है। कोसी नदी को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह प्राचीन काल से ही विनाशकारी बाढ़ और भूमि कटाव का कारण रही है। हर साल इस नदी के कारण बिहार के कई जिलों में बाढ़ आती है, जिससे हजारों लोगों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है।
हर साल मानसून के दौरान यह अपने रास्ते बदलती है और बड़ी बाढ़ लाती है।
बाढ़ के कारण हजारों लोग विस्थापित होते हैं और खेती-बाड़ी का नुकसान होता है।
कोसी नदी के जल के साथ बहने वाले गाद और मिट्टी के कारण भूमि कटाव होता है।
इससे न केवल खेती योग्य भूमि समाप्त होती है, बल्कि घर और बस्तियां भी डूब जाती हैं।
कोसी नदी ने अपने मार्ग को बदलते हुए कई बार गांवों और शहरों को बर्बाद किया है।
इसे “भारत की शोक नदी” के रूप में भी जाना जाता है।
बाढ़ और भूमि कटाव से निपटने के लिए कई सरकारी प्रयास किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
कोसी बैराज: नेपाल में कोसी नदी पर बैराज बनाया गया है, ताकि पानी का प्रबंधन किया जा सके।
बांध और नहरें: बिहार में बाढ़ को नियंत्रित करने और सिंचाई के लिए नहरों का निर्माण किया गया है।
कोसी नदी का प्रभाव बिहार के जीवन पर गहरा है। हालांकि यह विनाशकारी है, लेकिन सिंचाई और कृषि में भी इसका योगदान है। सही प्रबंधन और योजनाओं के माध्यम से इस “शोक नदी” को बिहार के लिए वरदान में बदला जा सकता है।