बजट एक देश की आर्थिक रीढ़ की हड्डी होता है। यह सरकार की वित्तीय नीतियों, आमदनी और खर्च का लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है। बजट केवल एक आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि यह राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा निर्धारित करता है। भारत और विश्व के अन्य देशों में बजट की ऐतिहासिक यात्रा काफी रोचक रही है।
बजट एक वित्तीय योजना है जिसमें किसी विशेष अवधि के लिए आय और व्यय का अनुमान लगाया जाता है। इसे अंग्रेजी में "Budget" कहा जाता है, जो लैटिन शब्द "Baguette" से लिया गया है, जिसका अर्थ "चमड़े की थैली" होता है।
संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार, “बजट वह योजना है जो किसी सरकार, संस्था, या व्यक्ति के लिए एक निश्चित अवधि में वित्तीय संसाधनों के उपयोग को दर्शाती है।”
प्राचीन समय में भी शासन व्यवस्था में आय-व्यय का रिकॉर्ड रखा जाता था। भारत में मौर्य काल (321-185 ई.पू.) में अर्थशास्त्री चाणक्य ने “अर्थशास्त्र” में कर प्रणाली और राजकोषीय नीति का विस्तृत उल्लेख किया है।
रोमन साम्राज्य में भी सरकारी व्यय और कराधान की योजनाएँ बनाई जाती थीं। मध्यकाल में भी शासकों द्वारा अपने खजाने की व्यवस्था के लिए कुछ नीतियाँ बनाई जाती थीं, लेकिन आधुनिक बजट प्रणाली 17वीं-18वीं शताब्दी में विकसित हुई।
बजट की आधुनिक प्रणाली ब्रिटेन से प्रारंभ हुई। 1689 में "ग्लोरियस रिवोल्यूशन" के बाद, ब्रिटिश संसद ने सरकारी खर्चों और कर संग्रह को नियंत्रित करना शुरू किया।
ब्रिटिश काल में बजट
भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान पहली बार 1860 में जेम्स विल्सन ने बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने टैक्स सिस्टम को सुधारने और सरकार के खर्चों को संतुलित करने के लिए कई नीतियाँ बनाई।
भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली और इसके बाद देश की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए बजट महत्वपूर्ण हो गया। 26 नवंबर 1947 को भारत का पहला बजट पेश किया गया, जिसे आर.के. शनमुखम चेट्टी ने प्रस्तुत किया।
भारत का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था। इस बजट की कुछ मुख्य विशेषताएँ थीं:
स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को प्रस्तुत किया गया था। इस बजट में भारत के विभाजन से उत्पन्न वित्तीय संकट को ध्यान में रखते हुए कर प्रणाली में सुधार और सार्वजनिक व्यय की योजनाएँ बनाई गईं।
भारतीय संविधान के अनुसार, बजट पेश करने की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:
संविधान के अनुच्छेद 112 में वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) का उल्लेख है। इसके अलावा, अनुच्छेद 265, 266, और 280 में कर संग्रह, सार्वजनिक निधि, और वित्त आयोग के संबंध में प्रावधान किए गए हैं।
राजस्व बजट और पूंजी बजट का विकास
राजस्व बजट में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से होने वाली आय शामिल होती है, जबकि पूंजी बजट में बुनियादी ढांचे और सरकारी योजनाओं पर खर्च किया जाता है।
| केंद्रीय बजट और राज्य बजट का अंतर | |||
| क्रम | विशेषता | केंद्रीय बजट | राज्य बजट |
| 1 | प्रस्तुत करता है | वित्त मंत्री | राज्य का वित्त मंत्री |
| 2 | नियंत्रण | केंद्र सरकार | राज्य सरकार |
| 3 | स्रोत | कर और गैर-कर राजस्व | केंद्र से अनुदान और राज्य कर |
भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। बजट आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और विकास योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने में सहायक होता है।
बजट केवल संख्याओं का खेल नहीं, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति और सामाजिक कल्याण का आधार है। इतिहास से लेकर वर्तमान तक, बजट का स्वरूप बदलता रहा है और भविष्य में भी यह परिवर्तनशील रहेगा।
भारत में पहला बजट कब प्रस्तुत किया गया?
7 अप्रैल 1860 को जेम्स विल्सन द्वारा |
स्वतंत्र भारत का पहला बजट किसने पेश किया?
आर.के. शनमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को।
बजट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
आर्थिक विकास, वित्तीय संतुलन, और जनकल्याण।
रेल बजट और आम बजट को कब जोड़ा गया?
2017 में।
भारत का वित्तीय वर्ष कब से कब तक होता है?
1 अप्रैल से 31 मार्च।